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Saturday, July 8, 2017

How to add stylish social widget on your blogger or website.



Add stylish social widget on your blogger or website.


Hello, Friends, bloggers and web developers! Here, I am going to share a cool social icon widget for your website and blog. This widget is responsive and cool in look. Pure CSS social icon widget for your website's footer and header. So, hope you will like it.




Script code of social icon widget to links your social site pages
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How to setup this Social icon widget?

Follow these steps:

1. Just copy & paste this code to notepad.

2. go to your blogger post

3. go to layout

4. click on add a gadget

5. select HTML/Javascript

6. give some (any) title

7. paste code in content box

8. Replace all the red marked text with your own text or page name.

9. save it then save arrangement and you have done it 

for the tutorial please watch my youtube video

Friday, June 30, 2017

WHAT IS GST (IN HINDI) संक्षेप में ...


  आखीरकार लागू हो गया “GST” 



नमस्ते भाइयों, 
तो आखीरकार लागू हो गया  “GST”

पिछले कई दिनों से आपने एक शब्द बार बार सुना होगाऑफिस में, बसों में, ट्रेन में सफर करते वक्त यह शब्द बार-बार हमारे कानों पर गूंज रहा है वह शब्द है जीएसटी कोई कहता है टैक्स है, कोई कहता है रेवलुएशन है, कोई कहता है अच्छा है, कोई कहता है पता नही ईतने सारे टैक्स है एक और सही |

तो आइए आज हम जानने की कोशिश करते हैं कि यह जीएसटी आखीर क्या हैआप कहेंगे जीएसटी  एक प्रकार का टैक्स है जैसे सर्विस टैक्स, इनकम टैक्स, सेल्स टैक्स उसी तरह यह एक टैक्स है तो उसको लेकर इतना घमासान क्यों मचा हेतो दोस्तों जीएसटी बाकी टैक्स की तरह केवल एक साधारण टैक्स नहीं है यह अपने आप में एक रेवलुएशन है जिससे हमारे देशकी अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है|







 जीएसटी” के जरिए देश एक होने जा रहा है लेकिन कैसे ? आइए समझने की कोशिश करते हैं  

जीएसटी” का फुल फॉर्म है गुड्स एंड सर्विस टैक्स वस्तुएं एवं सेवाएं कर.

फिलहाल हमारे देश की कर प्रणाली में मुख्य दो प्रकार के टैक्स है डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स, डायरेक्ट टैक्स जो है वह हमारे इनकम टैक्स जुड़ा है जिसका जीएसटी से कोई लेना-देना नहीं है किंतु जो इनडायरेक्ट टैक्स है वह कन्वर्ट हो कर जीएसटी बनेगा. 






हमारे कर प्रणाली में तकरीबन 18 से 19 प्रकार के इनडायरेक्ट टैक्सेस मौजूद है जैसे 

सर्विस टैक्स, सेल्स टैक्स, वेट, लक्जरी  टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, एंट्री टैक्स, मनोरंजन टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, और उनमें से कुछ टैक्स सेंट्रल गवर्नमेंट को पे करना पड़ता  है तो कुछ टेक्स्ट स्टेट गवर्नमेंट को पे करना पड़ता है जोकि जीएसटी लागू होने के बाद अब नहीं पड़ेगा जीएसटी एक ही बार जमा करना है. 





जीएसटी लागू होने से क्या होगा इसके फलस्वरुप कौन सी चीजें सस्ती होंगी और कौन सी महंगी ?

तमाम अटकलोंके बिच सरकार द्वारा दर का स्लैब बनाया गया  और वह है 0% 5% 12% 18% 28% , आपको बता दें कि पेटरोल जन्य सेवाए एवं वस्तुओं को GST से दुर रखा गया है। तो आईये जानते है कौनसी सेवाए एवं वस्तुएं कौनसी स्लैब मे रखी गई है? 

0% GST Rates Items
गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी (मुरमुरे), खोई, ब्रेड, गुड़, दूध, दही, लस्सी, खुला पनीर, अंडे, मीट-मछली, शहद, ताजी फल-सब्जियां, प्रसाद, नमक, सेंधा/काला नमक, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, पान के पत्ते, गर्भनिरोधक, स्टांप पेपर, कोर्ट के कागजात, डाक विभाग के पोस्टकार्ड/लिफाफे, किताबें, स्लेट-पेंसिल, चॉक, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, मैप, एटलस, ग्लोब, हैंडलूम, मिट्टी के बर्तन, खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार, बीज, बिना ब्रांड के ऑर्गेनिक खाद, सभी तरह के गर्भनिरोधक, ब्लड, सुनने की मशीन।

5% GST Rates Items
ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड आटा, ब्रांडेड शहद, चीनी, चाय, कॉफी, मिठाइयां, *खाद्य तेल,* स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन फल-सब्जियां, पैकिंग वाला पनीर, ड्राई फिश, न्यूजप्रिंट, ब्रोशर, लीफलेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस, झाडू, क्रीम, *मसाले,* जूस, साबूदाना, जड़ी-बूटी, लौंग, दालचीनी, जायफल, जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, ब्लड वैक्सीन, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फॉर्मूलेशन, क्रच, व्हीलचेयर, ट्रायसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप और उसके पार्ट्स, सोलर वाटर हीटर, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस, ईंट, मिट्टी के टाइल्स, साइकिल-रिक्शा के टायर, कोयला, लिग्नाइट, कोक, कोल गैस, सभी ओर (अयस्क) और कंसेंट्रेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस।

12% GST Rates Items
 नमकीन, भुजिया, *बटर ऑयल, घी*, मोबाइल फोन, ड्राई फ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन मीट-मछली, अगरबत्ती, कैंडल, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, गॉज, बैंडेज, प्लास्टर, ऑर्थोपेडिक उपकरण, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायो गैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्रॉइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, फ्लाईएश की ईंटें, कंघी, पेंसिल, क्रेयॉन।

18% GST Rates Items
हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, केक, जैम-जेली, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर कन्फेक्शनरी, फूड मिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स कंसेंट्रेट, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर, अकाउंट बुक, नोटबुक, इरेजर, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के ट-बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे का फ्रेम, गॉगल्स, विकलांगों की कार।

28% GST Rates Items 
कस्टर्ड पाउडर, इंस्टैंट कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, हेयर डाइ/क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, एल्युमीनियम फ्वायल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटो कॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घड़ियां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, पेंट-वार्निश, पुट्टी, प्लाई बोर्ड, मार्बल/ग्रेनाइट (ब्लॉक नहीं), प्लास्टर, माइका, स्टील पाइप, टाइल्स और सेरामिक्स प्रोडक्ट, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथ फिटिंग्स, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैंप, लाइट फिटिंग्स, एल्युमिनियम के डोर-विंडो फ्रेम, इनसुलेटेड वायर-केबल।


क्या फायदा होगा ?

इस विश्लेषण के बाद आप कहेंगे इससे देश को या आम जनता को क्या फायदा होगा ?

# एक देश एक टैक्स - दोस्तों जीएसटी पूरे देश के लिए एक टैक्स प्रणाली होगी पूरे देश में एक ही टैक्स लगेगा जिसकी बदौलत हर राज्य में एक वस्तू एक ही दाम में मिलेगी आज एक वस्तू दिल्ली में अलग कीमत में महाराष्ट्र में अलग कीमत में गुजरात में अलग कीमत में तो कर्नाटक में अलग कीमत में मिलती है लेकीन जीएसटी के लागू होने से एक ही वस्तु या एक ही सेवा हर राज्य में एक ही दाम में मिलेगी







# नो टेक्स्ट ऑन टैक्स - अगला फायदा यह होगा दोस्तों कई चीजें वस्तुए सेवाएं इस तरह की है जिन पर उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले कई तरह के टैक्स लगते आ रहें थे वह चीजें वस्तुएं जिन जिन प्रोसेस से गुजरती थी वहां पर जो जो टैक्स लाइबल होता था वह पे करना पड़ता था और सभी तरह के टैक्स पे करते करते उसका दाम से 10 गुना बढ़ जाता था जीएसटी के लगने से जो टैक्स पर टैक्स लगता था वह बंद हो जाएगा जाहिर है वस्तुओं की कीमतें कुछ हद तक कम हो जाएंगी





# पेपर वर्क कम होगा भाग दौड़ कम होगी फिलहाल जितने प्रकार के टैक्स है उतनेही डिपार्टमेंट है उतनाही डॉक्यूमेंटेशन करना पडता है कुछ टैक्स एस ऑनलाइन भरने पढ़ते हैं कुछ टैक्स एडवांस पे करने पड़ते हैं कुछ टेक्स्ट पे करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं किंतू जीएसटी लागू होने से सारी भागदौड़ बंद हो जाएगी जीएसटी का ऑनलाइन पोर्टल बनने जा रहा है उस पर काम चालू है जैसे ही वह लागू हो जाएगा हम ऑनलाइन रजिस्टर करके एक ही बार में जो भी टैक्स का अमाउंट है वह जमा करके निश्चिंत हो सकते हैं






# सबसे महत्वपूर्ण हमारे समय और पैसो की बचत हो यानी यह केवल एक काम टैक्स नहीं है बल्कि अर्थव्यवस्था में रिवोल्यूशन है उम्मीद है हमारी अर्थव्यवस्था मजबुत होनेमे जीएसटी अहम भुमीका निभाएगा जाते जाते यह बतादुं दुनियाके 165 देशोंमें जीएसटी कई सालोंसे लागु हे कहीं 9 परसेंट तो कहीं 35 परसेंट यहां तक की पाकीस्तानमें भी यह लागु है जो है 18 परसेंट.
अतह अंत भला तो सब भला यही सोचकर हमें बदलाव का स्वीकार करना चाहीए 
जय हिंद!..

टिपण्णी: ऊपरोक्त जानकारी ऊपलब्ध स्त्रोतोंसे संकलन करके प्रस्तुत की हे.

।। पंचरत्न हरिपाठ ।।




।। पंचरत्न हरिपाठ ।।
श्री संत ज्ञानॆश्वरमहाराज, श्री संत तुकाराममहाराज, श्री संत नामदॆवमहाराज, 
श्री संत ऎकनाथमहाराज व श्री संत निवृत्तिमहाराजकृत हरिपाठ.

।। जय जय राम कृष्णहरि ।।










।। जय जय राम कृष्णहरि ।।।। जय जय राम कृष्णहरि ।।। जय जय राम कृष्णहरि ।।
।। जय जय राम कृष्णहरि ।।।। जय जय राम कृष्णहरि ।।। जय जय राम कृष्णहरि ।।
।। जय जय राम कृष्णहरि ।।।। जय जय राम कृष्णहरि ।।। जय जय राम कृष्णहरि ।।
*****

श्री संत निवृत्तिमहाराजकृत हरिपाठ




।। श्री संत निवृत्तिमहाराजकृत हरिपाठ ।।
हरिविण दैवत नाहीं पैं अनुचित्तीं । अखंड श्रीपती नाम वाचॆ ।। १।।
रामकृष्ण मूर्ति या जपा आवृत्ती । नित्य नामॆं तृप्ती जाली आम्हां ।। २।।
नामाचॆनि स्मरणॆं नित्य पैं सुखांत । दुजीयाची मात नॆणॊ आम्ही ।। ३।।
निवृत्ति जपतु अखंड नामावळी । हृदयकमळीं कॆशीराज ।। ४।।
हरिविण चित्तीं न धरीं विपरीत । तरताती पतित रामनामॆं ।। १।।
विचारुनी पाहा ग्रंथ हॆ अवघॆ । जॆथॆं तॆथॆं सांग रामनाम ।। २।।
व्यासादिक भलॆ रामनामापाठीं । नित्यता वैकुंठीं तयां घर ।। ३।।
शुकादिक मुनि विरक्त संसारीं । रामनाम निर्धारीं उच्चारिलॆं ।। ४।।
चॊरटा वाल्मीकि रामनामीं रत । तॊही ऎक तरत रामनामीं ।। ५।।
निवृत्ति साचार रामनामी दृढ । अवघॆचि गूढ उगविलॆ ।। ६।।
हरिमार्ग सार यॆणॆंचि तरिजॆ । यॆरवीं उभिजॆ संसार रथ ।। १।।
जपतां श्रीहरी मॊक्ष नांदॆ नित्य । तरॆल पैं सत्य हरि नामॆं ।। २।।
काय हॆं ऒखद नामनामामृत । हरिनामॆं तृप्त करी राया ।। ३।।
निवृत्ति साचार हरिनाम जपत । नित्य हृदयांत हरी हरी ।। ४।।
ऎकॆविण दुजॆं नाहीं पैं यॆ सृष्टी । हॆं ध्यान किरीटी दिधलॆं हरी ।। १।।
नित्य या श्रीहरि जनीं पैं भरला । द्वैताचा अबॊला तया घरीं ।। २।।
हरीविणॆं दॆवॊ नाहीं नाहीं जनीं । अखंड पर्वणी हरी जपतां ।। ३।।
निवृत्ति साकार हरिनाम पाठ । नित्यता वैकुंठ हरिपाठ ।। ४।।
जपतां कुंटिणी उतरॆ विमान । नाम नारायण आलॆं मुखा ।। १।।
नारायण नाम तारक तॆं आम्हां । नॆणॊं पैं महिमा अन्य तत्त्वीं ।। २।।
तरिलॆ पतित नारायण नामॆं । उद्धरिलॆ प्रॆमॆं हरिभक्त ।। ३।।
निवृत्ति उच्चार नारायण नाम । दिननिशी प्रॆम हरी हरी ।। ४।।
ऎक तत्त्व हरि असॆ पैं सर्वत्र । ऐसॆं सर्वत्र शास्त्र बॊलियलॆं ।। १।।
हरिनामॆं उद्धरॆ हरिनामॆं उद्धरॆं । वॆगीं हरि त्वरॆं उच्चारी जॊ ।। २।।
जपता पैं नाम यमकाळ कांपॆ ।  हरी हरी सॊपॆं जपिजॆ सुखॆं ।। ३।।
निवृत्ति म्हणॆ हरिनामपाठ जपा । जन्मांतर खॆपा अंतरती ।। ४।।
गगनींचा घन जातॊ पैं वारॆन । अवचिता पतन अधॊपंथॆं ।। १।।
अध ऊर्ध्व हरि भाविला दुसरी । प्रपंचबॊहरी आपॊआप ।। २।।
निवृत्ति म्हणॆ जन हरीचॆं स्वरूप । कळाचॆं पैं माप हरिनाम ।। ३।।
सृष्टीच्या संमता सुरतरु तरु । बॊलिला विस्तारु धर्मशास्त्रीं ।। १।।
नॆघॊं हॆं तरु प्रपंचपरिवारु । प्रत्यक्ष ईश्वरू पुरॆ आम्हा ।। २।।
निवृत्ति निवांत हरीच सॆवित । दॊ अक्षरीं उचित इंद्रिया ।। ३।।
सर्वांभूतीं दया शांती पैं निर्धार । यॊग साचार जनीं इयॆ ।। १।।
न लगॆ मुंडण काया हॆं दंडणॆं । अखंड कीर्तन स्मरॆ हरी ।। २।।
शिव जाणॆं जीवीं रक्षला चैतन्य । हॆ जीवीं कारुण्य सदा भावीं ।। ३।।
गगनीं सूर्य तपॆ अनंत तारा लॊपॆ । ऎकची स्वरूपॆं आत्मा तैसा ।। ४।।
उगवला कळीं उल्हासु कमळीं । तैसा तॊ मंडली चंद्र लॆखा ।। ५।।
निवृत्तिमंडळ अमृत सकळ । घॆतलॆं रसाळ हरिनाम ।। ६।।
१०
जयाचॆनि सुखॆं चळत पैं विश्व । नांदॆ जगदीश सर्वा घटीं ।। १।।
त्याचॆं नाम हरी त्याचॆं नाम हरी । प्रपंचबॊहरी कल्पनॆची ।। २।।
शांति त्याची नारी प्रकृति विकारी । उन्मनी बॊवरी हृदयांतु ।। ३।।
निवृत्तिदॆवीं साधिली राणीव । हरपलॆ भाव इंद्रियांचॆ ।। ४।।
११
हरीविण भावॊ वायांचि संदॆहॊ । हरि दॆवॊ दॆवॊ आहॆ सत्य ।। १।।
हरी हरी वाचॆ ऐसॆं जपा साचॆं । नाहीं त्या यमाचॆ मॊहजाळ ।। २।।
हरीविण सार नाहीं पैं निर्धार । हरिविण पार न पाविजॆ ।। ३।।
निवृत्ति श्रीहरि चिंती निरंतरीं । हरि ऎक अंतरीं सर्वीं नांदॆ ।। ४।।
१२
ध्यान धरा हरी विश्रांति नामाची । विठ्ठलींच साची मनॊवृत्ति ।। १।।
ध्यानॆविण मन विश्रांतिविण स्थान । सूर्याविण गगन शून्य दिसॆ ।। २।।
नलगॆ साकार विठ्ठल मनॊवृत्ति । प्रपंच समाप्ति ती अक्षरीं ।। ३।।
निवृत्ति समता विठ्ठल कीर्तन । करितां अनुदीन मन मॆळॆ ।। ४।।
१३
प्रपंचाची वस्ती व्यर्थ काया काज । आम्हां बॊलता लाज यॆत सयॆ ।। १।।
काय करूं हरी कैसां हा गवसॆ । चंद्रसूर्य अंवसॆ ऎकसूत्र ।। २।।
तैसॆं करूं मन निरंतर ध्यान । उन्मनी साधन आम्हां पुरॆ ।। ३।।
निवृत्ति हरिपाठ नाम हॆंचि वाट । प्रपंच फुकट दिसॆ आम्हां ।। ४।।
१४
लटिका संसार वाढविसी व्यर्थ । विषयाचा स्वार्थ क्षणॆं करीं ।। १।।
नकॊ शिणॊं दुःखॆ का भरिसी शॊकॆं । ऎकतत्त्वॆं ऎकॆं मन लावीं ।। २।।
लावीं उन्मनीं टाळी टाळिसी नॆई बाळी । अखंड वनमाळी हृदयवटी ।। ३।।
निवृत्ति चपळ राहिला अचळ । नाहीं काळ वॆळ भजतां हरी ।। ४।।
१५
कल्पना काजळी कल्पिलॆ कवळी । कैसॆनि जवळीं दॆव हॊय ।। १।।
टाकी हॆ कल्पना दुरित वासना । अद्वैत नारायणा भजॆं कां रॆ ।। २।।
मॊहाच्या जीवनीं नकॊ करूं पर्वणी । चिंती कां आसनीं नारायण ।। ३।।
निवृत्ति अवसरु कृष्णनाम पैं सारु । कल्पना साचारु हरी झाला ।। ४।।
१६
मॊहाचॆनि दॆठॆं मॊहपाश गिळी । कैसॆनि गॊपाळीं सरता हॊय ।। १।।
मॊहाचॆनि मॊहनॆं चिंतितां श्रीहरी । वाहिजु भीतरीं अवघा हॊय ।। २।।
दिननिशीं नाम जपतां श्रीहरीचॆं । मग या मॊहाचॆं मॊहन नाहीं ।। ३।।
निवृत्ति आगम मॊहन साधन । सर्व नारायण ऎका तत्त्वॆं ।। ४।।
१७
तिमिरपडळॆं प्रपंच हा भासॆ । झाकॊळला दिसॆ आत्मनाथ ।। १।।
हरीविण दुजॆं चिंतितां निभ्रांत । अवघॆंचि दिसत माया भ्रम ।। २।।
सांडूनि तिमिर सर्व नारायण । हॆंचि पारायण नित्य करी ।। ३।।
निवृत्ति सज्जन अवघा आत्मराज । ऎकतत्त्व बीज नाम लाहॊ ।। ४।।
१८
प्रवृत्ति निवृत्ति या दॊन्ही जनीं । वनीं काज करुनी असती ।। १।।
नारायण नाम जपतांचि दॊन्ही । ऎकतत्त्वीं करणी सांगिजॆ गुज ।। २।।
आशॆचॆ विलास गुंफॊनिया महिमा । सत्त्वीं तत्त्व सीमा निजज्ञानॆ ।। ३।।
निवृत्ति तत्त्वतां मनाचॆ मॊहन । नित्य समाधानॆं रामनामॆं ।। ४।।
१९
क्षॆत्राचा विस्तार क्षॆत्रज्ञवृत्ति । अवघी हॆ क्षिती ऎकरूपॆं ।। १।।
शांति दया पैसॆ क्षमा जया रूप । अवघॆची स्वरूप आत्माराम ।। २।।
निंदा द्वॆष चॆष्टा अभिमान भाजा । सांडूनियां भजा कॆशवासी ।। ३।।
निवृत्ति तिष्ठतु ऎकरूप चित्त । अवघींच समस्त गिळियॆलीं ।। ४।।

२०
आम्ही चकॊर हरि चंद्रमा । आम्ही कळा तॊ पौर्णिमा ।। १।।
कैसा बाहिजु भीतरी हरी । बिंब बिंबला ऎक सूत्रीं ।। २।।
आम्ही दॆही तॊ आत्मा । आम्ही विदॆही तॊ परमात्मा ।। ३।।
ऐक्यपणॆं सकळ वसॆ । द्वैतबुद्धी कांहीं न दिसॆ ।। ४।।
निवृत्ति चातक इच्छिताहॆ । हरिलागीं बरॆं तॆं पाहॆ ।। ५।।
२१
ज्याचॆ मुखीं नाम अमृतसरिता । तॊचि ऎक पुरता घटु जाणा ।। १।।
नामचॆनि बळॆ कळिकाळ आपणा । ब्रह्मांडा यॆसणा तॊचि हॊय ।। २।।
न पाहॆ तयाकडॆ काळ अवचिता । नामाची सरिता जया मुखीं ।। ३।।
निवृत्ति नामामृत उच्चारी रामनामॆ । नित्य परब्रह्म त्याचॆ घरीं ।। ४।।
२२
नित्य नाम वाचॆ तॊचि ऎक धन्य । त्याचॆं शुद्ध पुण्य इयॆ जनीं ।। १।।
रामनामकीर्ति नित्य मंत्र वाचॆ । दहन पापाचॆं ऎका नामॆं ।। २।।
ऐसा तॊ नित्यता पुढॆ तत्त्व नाम । नाहीं तयासम दुजॆं कॊणी ।। ३।।
निवृत्ति अव्यक्त रामनाम जपॆ । नित्यता पैं सॊपॆं रामनाम ।। ४।।
२३
अखंड जपतां रामनाम वाचॆ । त्याहूनी दैवाचॆ कॊण भूमी ।। १।।
अमृतीं राहिलॆ कैचॆं मरण । नित्यता शरण हरिचरणा ।। २।।
नाममंत्र रासी अनंत पुण्य त्यासी । नाहीं पैं भाग्यासी पार त्याच्या ।। ३।।
निवृत्ति म्हणॆ सार रामनाम मंत्र । कैंचा त्यासी शत्रु जिती जनीं ।। ४।।
२४
नाम नाहीं वाचॆ तॊ नर निर्दैव । कैसॆनि दॆव पावॆल तया ।। १।।
जपॆ नाम वाचॆं रामनाम पाठॆं । जाशील वैकुंठॆ हरी म्हणता ।। २।।
न पाहॆ पैं दृष्टीं कळिकाळ तुज । रामनाम बीज मंत्रसार ।। ३।।
निवृत्ति म्हणॆ नाम जपावॆं नित्यता । आपणचि तत्त्वतां हॊईल हरी ।। ४।।
२५
नामाचॆनि बळॆं तारिजॆ संसार । आणिक विचार करूं नकॊ ।। १।।
नाम जप वॆगीं म्हणॆ हरी हरी । प्रपंच बॊहरी आपॊआप ।। २।।
नित्यता भजन दॆवद्विज करी । नाम हॆ उcचारि रामराम ।। ३।।
निवृत्ति जपतु राम राम वाचॆ । दहन पापाचॆं आपॊआप ।। ४।।

।। इति श्रीनिवृत्तिनाथ हरिपाठ समाप्त  ।।

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